Transliteration: (Was'alhum 'anil qaryatil latee kaanat haadiratal bahri iz ya'doona fis Sabti iz ta'teehim heetaanuhum yawma Sabtihim shurra'anw wa yawma laa yasbitoona laa ta'teehim; kazaalika nabloohum bimaa kaanoo yafsuqoon)
यह बस्ती इलाह कहलाती थी, जो मदयन और सीनाई के दरमियान थी। कुछ मुफस्सिरीन ने इसे तिब्रिया (सीरिया) या मदयन भी बताया है। यहां के लोग मछली पकड़कर गुज़ारा करते थे। अल्लाह ने उन्हें हुक्म दिया कि शनिवार को मछली पकड़ना हराम है, मगर अल्लाह की ओर से आज़माइश यह थी कि उसी दिन मछलियाँ सबसे ज़्यादा सतह पर नज़र आतीं और दूसरे दिनों कम। उन्होंने सब्र खो दिया और शनिबार को मछली पकड़ने लगे।
यहूदियों के लिए शनिवार का दिन मुक़द्दस था, जैसे मुसलमानों के लिए जुमे का दिन। उस दिन शिकार और तिजारत मना थी। इस्लाम में अल्लाह ने आसानी फ़रमाई — मुसलमानों पर सिर्फ़ जुमे की नमाज़ के वक्त कारोबार रोकना लाज़मी किया गया, और वह भी सिर्फ़ उन्हीं पर जिन पर जुमे की नमाज़ फ़र्ज़ है।
इस बस्ती के लोग तीन हिस्सों में बंट गए:
यह वाक़िआ इस बात का बड़ा सबक़ है कि अल्लाह के हुक्म की नाफ़रमानी करने वाले और खामोश तमाशाई बनने वाले दोनों सख़्त गिरफ़्त में आ सकते हैं।
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