कुरान - 7:165 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

165
فَلَمَّا نَسُواْ مَا ذُكِّرُواْ بِهِۦٓ أَنجَيۡنَا ٱلَّذِينَ يَنۡهَوۡنَ عَنِ ٱلسُّوٓءِ وَأَخَذۡنَا ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ بِعَذَابِۭ بَـِٔيسِۭ بِمَا كَانُواْ يَفۡسُقُونَ

Transliteration: (Falammaa nasoo maa zukkiroo bihee anjainal lazeena yanhawna 'anis sooo'i wa akhaznal lazeena zalamoo bi'azaabim ba'eesim bimaa kaanoo yafsuqoon)

फिर जब वे लोग वह नसीहत भुला बैठे जो उन्हें दी गई थी, तो हमने उन लोगों को बचा लिया जो बुराई से रोकते थे, और ज़ालिमों को उनकी नाफ़रमानी के सबब से सख़्त अज़ाब में पकड़ लिया [378]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 165 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-आ‘राफ़ – आयत 165 की तफ़्सीर

✅ [377] खामोश गिरोह पर अज़ाब का ज़िक्र नहीं

इस आयत में तीसरे गिरोह (खामोश रहने वालों) का कोई ज़िक्र नहीं है। इससे इशारा मिलता है कि उन पर अज़ाब नहीं हुआ। अल्लाह का अज़ाब सिर्फ़ उन पर उतरा जिन्होंने खुलकर गुनाह किया और ख़िलाफ़वरज़ी की। इस तरह खामोश लोग न तो गुनाह में शरीक थे और न ही ज़ालिमों के मददगार।

✅ [378] बंदरों में तब्दील करने की सज़ा

रिवायतों के मुताबिक़ हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने गुनहगारों पर लानत की। नतीजा ये हुआ कि एक रात में वे लोग बंदरों में तब्दील कर दिए गए।

  • सुबह ईमान वालों ने देखा कि पूरा इलाक़ा बंदरों से भर गया है।
  • ये बंदर अपने रिश्तेदारों को पहचानते थे और रोते थे, लेकिन बोल नहीं सकते थे।
  • तीन दिन बाद सब हलाक कर दिए गए।

अहम बात यह है कि आज के बंदर उनकी नस्ल से नहीं हैं, क्योंकि जिनको अल्लाह तआला इस तरह तब्दील करता है, उनकी औलाद नहीं होती।

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