Transliteration: (Falammaa nasoo maa zukkiroo bihee anjainal lazeena yanhawna 'anis sooo'i wa akhaznal lazeena zalamoo bi'azaabim ba'eesim bimaa kaanoo yafsuqoon)
इस आयत में तीसरे गिरोह (खामोश रहने वालों) का कोई ज़िक्र नहीं है। इससे इशारा मिलता है कि उन पर अज़ाब नहीं हुआ। अल्लाह का अज़ाब सिर्फ़ उन पर उतरा जिन्होंने खुलकर गुनाह किया और ख़िलाफ़वरज़ी की। इस तरह खामोश लोग न तो गुनाह में शरीक थे और न ही ज़ालिमों के मददगार।
रिवायतों के मुताबिक़ हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने गुनहगारों पर लानत की। नतीजा ये हुआ कि एक रात में वे लोग बंदरों में तब्दील कर दिए गए।
अहम बात यह है कि आज के बंदर उनकी नस्ल से नहीं हैं, क्योंकि जिनको अल्लाह तआला इस तरह तब्दील करता है, उनकी औलाद नहीं होती।
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