कुरान - 7:167 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

167
وَإِذۡ تَأَذَّنَ رَبُّكَ لَيَبۡعَثَنَّ عَلَيۡهِمۡ إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلۡقِيَٰمَةِ مَن يَسُومُهُمۡ سُوٓءَ ٱلۡعَذَابِۗ إِنَّ رَبَّكَ لَسَرِيعُ ٱلۡعِقَابِ وَإِنَّهُۥ لَغَفُورٞ رَّحِيمٞ

Transliteration: (Wa iz ta azzana Rabbuka la yab'asannna 'alaihim ilaa Yawmil Qiyaamati mai yasoomuhum sooo'al 'azaab; inna Rabbaka lasaree'ul 'iqaabi wa innahoo la Ghafoorur Raheem)

और (याद करो) जब तुम्हारे रब ने एलान कर दिया कि क़यामत तक वह उन पर ऐसे लोग भेजता रहेगा जो उन्हें सख़्त आज़ाब देंगे [380]। बेशक तुम्हारा रब जल्दी पकड़ करने वाला है [381] और बेशक वह बड़ा बख़्शने वाला, रहमत करने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 167 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-आ‘राफ़ – आयत 167 की तफ़्सीर

✅ [380] बनी इसराईल पर लगातार दुनिया की सज़ा

इस आयत में अल्लाह तआला का यह एलान है कि बनी इसराईल पर क़यामत तक वक़्फ़ा-ब-वक़्फ़ा ऐसे हाकिम और क़ौमें मुसल्लत की जाएँगी जो उन्हें सख़्त तकलीफ़ें देंगी।

  • कभी बख़्त नस्र और सनजरिब जैसे बादशाहों ने उन्हें तबाह किया।
  • कभी रोमनों और ईसाई हाकिमों के ज़ुल्म का सामना किया।
  • बाद में वे मुसलमानों की हकूमत के ज़ेरे-निगरां रहे।
  • फिर अंग्रेज़ों जैसी औपनिवेशिक ताक़तों के क़ब्ज़े में आए।
  • आज अगर उनकी फिलस्तीन में हुकूमत है, तो वह भी आरज़ी (अस्थायी) है और आख़िरकार उन्हें रसवाई का सामना करना पड़ेगा।

✅ [381] गुनाहों की सज़ा नस्ल दर नस्ल

इसमें इशारा है कि बनी इसराईल पर यह सज़ा सिर्फ़ उनके पुरख़ों के गुनाह की वजह से नहीं, बल्कि इस वजह से भी जारी है कि उनकी आने वाली नस्लें भी उन बुराइयों पर राज़ी हुईं या उन्हें जारी रखा।

  • शब्बात (सैबथ) की हुरमत तोड़ने वालों की सज़ा सिर्फ़ उसी वक़्त तक सीमित नहीं रही।
  • बाद की नस्लों को भी सख़्त हाकिमों के ज़ुल्म का सामना करना पड़ा।
  • यह अल्लाह की इंसाफ़ पसंदी की निशानी है कि गुनाह का असर अगली नस्लों तक पहुँच सकता है, अगर वे उस गुनाह को जारी रखें।

✅ [382] आख़िरत की बड़ी सज़ाएँ

यह दुनिया की सज़ाएँ आख़िरी सज़ा नहीं हैं।

  • मौत के वक़्त,
  • क़ब्र में,
  • और क़यामत के दिन,
    उन्हें इससे भी बड़ी और हमेशा रहने वाली सज़ा का सामना करना होगा।

इस तरह अल्लाह तआला ने यह दिखा दिया कि उसकी पकड़ दुनिया और आख़िरत दोनों में जारी रहती है, और साथ ही तौबा व सुधार करने वालों के लिए वह बख़्शने वाला और रहमत करने वाला भी है।

 

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