Transliteration: (Wa iz ta azzana Rabbuka la yab'asannna 'alaihim ilaa Yawmil Qiyaamati mai yasoomuhum sooo'al 'azaab; inna Rabbaka lasaree'ul 'iqaabi wa innahoo la Ghafoorur Raheem)
इस आयत में अल्लाह तआला का यह एलान है कि बनी इसराईल पर क़यामत तक वक़्फ़ा-ब-वक़्फ़ा ऐसे हाकिम और क़ौमें मुसल्लत की जाएँगी जो उन्हें सख़्त तकलीफ़ें देंगी।
इसमें इशारा है कि बनी इसराईल पर यह सज़ा सिर्फ़ उनके पुरख़ों के गुनाह की वजह से नहीं, बल्कि इस वजह से भी जारी है कि उनकी आने वाली नस्लें भी उन बुराइयों पर राज़ी हुईं या उन्हें जारी रखा।
यह दुनिया की सज़ाएँ आख़िरी सज़ा नहीं हैं।
इस तरह अल्लाह तआला ने यह दिखा दिया कि उसकी पकड़ दुनिया और आख़िरत दोनों में जारी रहती है, और साथ ही तौबा व सुधार करने वालों के लिए वह बख़्शने वाला और रहमत करने वाला भी है।
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