कुरान - 7:168 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

168
وَقَطَّعۡنَٰهُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ أُمَمٗاۖ مِّنۡهُمُ ٱلصَّـٰلِحُونَ وَمِنۡهُمۡ دُونَ ذَٰلِكَۖ وَبَلَوۡنَٰهُم بِٱلۡحَسَنَٰتِ وَٱلسَّيِّـَٔاتِ لَعَلَّهُمۡ يَرۡجِعُونَ

Transliteration: (Wa qatta'naahum fil ardi umaman min humus saalihoona wa min hum doona zaalika wa balawnaahum bil hasanaati was saiyi'aati la'allahum yarji'oon)

और हमने उन्हें ज़मीन में अलग-अलग क़ौमों [383] में फैला दिया। उनमें से कुछ सालेह (नेक) थे और उनमें से कुछ दूसरे [384]। और हमने उन्हें अच्छे और बुरे हालात से आज़माया ताकि वे (हमारी तरफ) रुजू़ करें [385]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 168 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 168 की तफ़्सीर

✅ [383] उन्हें दुनिया में अलग-अलग क़ौमों में फैला दिया गया

यहाँ बनी इस्राईल का ज़िक्र है जिन्हें अल्लाह ने पूरी दुनिया में अलग-अलग जगहों पर फैला दिया। यह उनकी नाफ़रमानी और गुनाहों की सज़ा थी। उनकी कमज़ोरी और बिखराव ही उनके लिए ज़िल्लत (अपमान) और बे-इज़्ज़ती का सबब बन गया।

✅ [384] उनमें नेक लोग भी थे

अल्लाह तआला ने साफ़ कर दिया कि सब यहूदी बुरे नहीं थे। उनमें नेक लोग भी हुए जैसे अब्दुल्लाह इब्ने सलाम और कअब अल-अहबार जिन्होंने इस्लाम क़ुबूल किया। लेकिन उनमें ऐसे लोग भी थे जो गुमराही पर अड़े रहे, दीन में तबदीली करते रहे और हक़ का इन्कार करते रहे।

✅ [385] आसानियों और मुश्किलों से आज़माइश

अल्लाह ने उन्हें कभी नेमतें, सेहत, इज़्ज़त और रिज़्क़ दिया, और कभी क़हत, बीमारी, ज़िल्लत और मुसीबतें उतारीं। यह सब उनकी आज़माइश थी ताकि वे तौबा करके अल्लाह की तरफ रुजू़ करें।

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