कुरान - 7:170 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

170
وَٱلَّذِينَ يُمَسِّكُونَ بِٱلۡكِتَٰبِ وَأَقَامُواْ ٱلصَّلَوٰةَ إِنَّا لَا نُضِيعُ أَجۡرَ ٱلۡمُصۡلِحِينَ

Transliteration: (Wallazeena yumas sikoona bil Kitaabi wa aqaamus Salaata innaa laa nudeeu'ajral musliheen)

और जिन्होंने किताब [392] को मज़बूती से थामा और नमाज़ क़ायम की — तो हम नेक़ों का अजर ज़ाया नहीं करते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 170 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 170 की तफ़्सीर

✅ [392] किताब पर अमल और नमाज़ की पाबंदी

यह आयत उन यहूदी आलिमों के बारे में नाज़िल हुई जो तौरात की हिफ़ाज़त करते थे, उसे न छुपाते थे और न बदलते थे। जैसे अब्दुल्लाह इब्ने सलाम रह०, जिन्होंने सच्चाई की वजह से इस्लाम क़ुबूल किया और सहाबी बने।
अल्लाह तआला ने साफ़ कर दिया कि जो किताब को थामे रहें और नमाज़ की पाबंदी करें, अल्लाह उनका अजर-ओ-इनाम हरगिज़ ज़ाया नहीं करता।

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