Transliteration: (Wallazeena yumas sikoona bil Kitaabi wa aqaamus Salaata innaa laa nudeeu'ajral musliheen)
यह आयत उन यहूदी आलिमों के बारे में नाज़िल हुई जो तौरात की हिफ़ाज़त करते थे, उसे न छुपाते थे और न बदलते थे। जैसे अब्दुल्लाह इब्ने सलाम रह०, जिन्होंने सच्चाई की वजह से इस्लाम क़ुबूल किया और सहाबी बने।
अल्लाह तआला ने साफ़ कर दिया कि जो किताब को थामे रहें और नमाज़ की पाबंदी करें, अल्लाह उनका अजर-ओ-इनाम हरगिज़ ज़ाया नहीं करता।
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