Transliteration: (Wa iz nataqnal jabala fawqahum ka annahoo zullatunw wa zannooo annahoo waaqi'un bihim khuzoo maaa aatainaakum biquwwatinw wazkuroo maa feehi la'allakum tattaqoon)
अल्लाह के हुक्म से हज़रत जिब्रील अ़ै० ने पहाड़ को उखाड़कर बनी इस्राईल के ऊपर ऐसे उठा लिया जैसे साया। चूँकि अल्लाह के नेक बन्दों का काम भी अल्लाह ही की तरफ मंसूब होता है, इसलिए फ़रमाया गया — “हमने पहाड़ उठाया।”
जब पहाड़ उनके ऊपर मंडलाने लगा तो सब बनी इस्राईल सज्दे में गिर पड़े। उन्होंने अपना बायाँ गाल ज़मीन पर रखा और एक आँख ऊपर रखी कि कहीं पहाड़ गिर न पड़े। कहा जाता है कि आज तक यहूदियों का सज्दा अलग अंदाज़ में होता है, जो उसी वक़्त की यादगार है।
जब हज़रत मूसा अ़ै० पूरी तौरात लेकर आए तो बनी इस्राईल उसकी सख़्ती की वजह से हिचकिचाने लगे। तब अल्लाह ने पहाड़ को उनके ऊपर उठा दिया और कहा — “या तो किताब क़ुबूल करो या दबा दिए जाओ।”
यहाँ से यह भी समझ आता है कि कुरआन 23 साल में धीरे-धीरे नाज़िल हुआ, ताकि लोग आसानी से उसकी बातों को अपना सकें, जबकि बनी इस्राईल पर हुक्म अचानक उतार दिए गए थे।
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