Transliteration: (Aw taqoolooo innamaaa ashraka aabaaa 'unaa min qablu wa kunnaa zurriyyatan min ba'dihim 'a fa tuhlikunaa bi maa fa'alal mubtiloon)
इस आयत में साफ़ कर दिया गया कि जब सब रूहों से तौहीद का एहद लिया जा चुका है, तो कोई अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। अगर कोई कहे: “हम तो अपने बाप-दादाओं के रास्ते पर चले थे,” तो यह दलील क़बूल नहीं होगी।
क्योंकि हर शख़्स ने खुद अल्लाह की वहदानीयत की गवाही दी थी। इसलिए जाहिलाना तौर पर बाप-दादाओं की अंधी पैरवी (ताक़लीद) करना हुज्जत नहीं बन सकता। दीन को इल्म और यक़ीन के साथ अपनाना फ़र्ज़ है, न कि सिर्फ़ मीरास के तौर पर।
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