कुरान - 7:173 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

173
أَوۡ تَقُولُوٓاْ إِنَّمَآ أَشۡرَكَ ءَابَآؤُنَا مِن قَبۡلُ وَكُنَّا ذُرِّيَّةٗ مِّنۢ بَعۡدِهِمۡۖ أَفَتُهۡلِكُنَا بِمَا فَعَلَ ٱلۡمُبۡطِلُونَ

Transliteration: (Aw taqoolooo innamaaa ashraka aabaaa 'unaa min qablu wa kunnaa zurriyyatan min ba'dihim 'a fa tuhlikunaa bi maa fa'alal mubtiloon)

या (यह बहाना न करो कि) “हमारे बाप-दादा हमसे पहले शिर्क करते रहे और हम तो उनके बाद बस उनकी औलाद थे। तो क्या तू हमें उस चीज़ पर हलाक करेगा जो झूटे लोग करते थे?” [400] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 173 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 173 की तफ़्सीर

✅ [400] बाप-दादाओं के बहाने से निजात नहीं

इस आयत में साफ़ कर दिया गया कि जब सब रूहों से तौहीद का एहद लिया जा चुका है, तो कोई अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। अगर कोई कहे: “हम तो अपने बाप-दादाओं के रास्ते पर चले थे,” तो यह दलील क़बूल नहीं होगी।
क्योंकि हर शख़्स ने खुद अल्लाह की वहदानीयत की गवाही दी थी। इसलिए जाहिलाना तौर पर बाप-दादाओं की अंधी पैरवी (ताक़लीद) करना हुज्जत नहीं बन सकता। दीन को इल्म और यक़ीन के साथ अपनाना फ़र्ज़ है, न कि सिर्फ़ मीरास के तौर पर।

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