कुरान - 7:175 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

175
وَٱتۡلُ عَلَيۡهِمۡ نَبَأَ ٱلَّذِيٓ ءَاتَيۡنَٰهُ ءَايَٰتِنَا فَٱنسَلَخَ مِنۡهَا فَأَتۡبَعَهُ ٱلشَّيۡطَٰنُ فَكَانَ مِنَ ٱلۡغَاوِينَ

Transliteration: (Watlu 'alaihim naba allazeee aatainaahu Aayaatinaa fansalakha minhaa fa atba'a hush Shaytaanoo fakaana minal ghaaween)

और (ऐ महबूब) उन्हें उसका हाल सुनाओ जिसको हमने अपनी आयतें दी थीं [402], फिर वह उनसे अलग हो गया [403], तो शैतान उसके पीछे पड़ गया और वह गुमराहों में से हो गया [404]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 175 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 175 की तफ़्सीर

✅ [402] अल्लाह की निशानियों का अता होना

इससे मुराद वह शख़्स है जिसे अल्लाह ने इल्म और अपनी आयतों की पहचान बख़्शी थी। उसे दीनी मरतबा और इज्ज़त भी हासिल थी।

✅ [403] आयतों से किनारा करना

उसने इस इल्म और हिदायत को छोड़ दिया, यानी उस पर अमल न किया, उसे अपनी ज़िंदगी से अलग कर लिया। इस बे-रुख़ी ने उसे अल्लाह की रहमत से दूर कर दिया।

✅ [404] शैतान का पीछा करना और गुमराही

जब उसने हक़ को छोड़ दिया तो शैतान ने उसे क़ाबू में कर लिया और वह पूरी तरह गुमराही में पड़ गया।
यह सबक़ है कि इल्म अगर अमल से खाली हो जाए तो वह इंसान को हिदायत के बजाय हलाक़त में धकेल देता है।

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