कुरान - 7:174 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

174
وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ ٱلۡأٓيَٰتِ وَلَعَلَّهُمۡ يَرۡجِعُونَ

Transliteration: (Wa kazaalika nufassilul Aayaati wa la'allahum yarji'oon)

और इसी तरह हम अपनी आयतें अलग-अलग अंदाज़ से बयान करते हैं, ताकि लोग (हमारी तरफ) रुजू़ करें [401]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 174 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 174 की तफ़्सीर

✅ [401] अल्लाह की निशानियों का मुख़्तलिफ़ बयान

अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत की निशानियों और दलीलों को तरह-तरह से बयान करता है — कहीं अज़ाब की चेतावनी देकर डराया जाता है, कहीं इनाम का वादा करके उम्मीद दिलाई जाती है, और कहीं अक़्ली दलीलें पेश की जाती हैं।
इसका मक़सद यह है कि हर इंसान, चाहे उसका मिज़ाज कैसा भी हो और उसकी अक़्ल का दर्जा जो भी हो, हक़ की तरफ रुजू़ करने का रास्ता पा सके।

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