कुरान - 7:172 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

172
وَإِذۡ أَخَذَ رَبُّكَ مِنۢ بَنِيٓ ءَادَمَ مِن ظُهُورِهِمۡ ذُرِّيَّتَهُمۡ وَأَشۡهَدَهُمۡ عَلَىٰٓ أَنفُسِهِمۡ أَلَسۡتُ بِرَبِّكُمۡۖ قَالُواْ بَلَىٰ شَهِدۡنَآۚ أَن تَقُولُواْ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ إِنَّا كُنَّا عَنۡ هَٰذَا غَٰفِلِينَ

Transliteration: (Wa iz akhaza Rabbuka min Baneee Aadama min zuhoorihim zurriyyatahum wa ashhadahum 'alaa anfusihim alastu bi Rabbikum qaaloo balaa shahidnaaa; an taqooloo Yawmal Qiyaamati innaa kunnaa 'an haazaa ghaafileen)

और (ऐ महबूब) याद करो जब तुम्हारे रब ने आदम की औलाद [396] की नस्लें उनकी कमर से निकालीं और उन्हें उनके ही ऊपर गवाह बनाया [397], (फ़रमाया): “क्या मैं तुम्हारा रब नहीं हूँ?” उन्होंने कहा: “क्यों नहीं, हम गवाही देते हैं” [398] — ताकि तुम क़ियामत के दिन यह न कहो: “हम तो इससे ग़ाफ़िल थे” [399]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 172 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 172 की तफ़्सीर

✅ [396] तमाम इंसानों की रूहें पैदा की गईं

इसका मतलब यह है कि अल्लाह ने हज़रत आदम अ़ै० की कमर से क़ियामत तक आने वाली सारी औलाद को रूहानी शक्ल में पैदा किया। उस वक़्त इंसान ऐसे थे जैसे अनगिनत चींटियाँ, और पूरी इंसानियत अपने अस्ल के साथ मौजूद थी।

✅ [397] आपस में गवाही दिलाना

अल्लाह तआला ने उनके दिलों में अपनी तौहीद डाल दी और उनसे आपस में गवाही ली कि वही उनका रब है। यह सिर्फ़ सामूहिक इकरार नहीं था, बल्कि एक रूहानी एहद था, जिसमें अंदरूनी यक़ीन और बाहरी गवाही दोनों शामिल थे।

✅ [398] आलमी एहद और सबसे पहले नबी ﷺ का जवाब

यह एहद सारी रूहों से लिया गया — नबियों, औलिया, मोमिनों, मुनाफ़िक़ों और कुफ़्फ़ार सभी से। सबसे पहले “हाँ” कहने वाले हज़रत मुहम्मद ﷺ थे। फिर नबियों ने कहा, फिर नेक बंदों ने और आखिर में बाक़ी इंसानों ने। मोमिनों ने इसे खुशी से कबूल किया और कुफ़्फ़ार ने मजबूरी से, लेकिन यह एहद सब पर लाज़िम हुआ।

✅ [399] क़ियामत के दिन कोई उज्र नहीं रहेगा

इस गवाही की वजह से कोई यह बहाना नहीं कर सकेगा कि वह तौहीद से बेख़बर था। हालाँकि इंसान को यह बात याद नहीं, लेकिन अल्लाह ने अपने नबियों और वही के ज़रिये इस एहद को याद दिलाया। जैसे माँ अपने बच्चे को बचपन की भूली बातें याद दिलाती है और बच्चा मान लेता है। इस तरह, अल्लाह ने हक़ को वाज़ेह कर दिया ताकि इन्कार का कोई रास्ता न बचे।

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