कुरान - 7:177 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

177
سَآءَ مَثَلًا ٱلۡقَوۡمُ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَأَنفُسَهُمۡ كَانُواْ يَظۡلِمُونَ

Transliteration: (Saaa'a masalanil qawmul lazeena kazzaboo bi Aayaatinaa wa anfusahum kaanoo yazlimoon)

कितनी बुरी मिसाल है उन लोगों की जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया। और उन्होंने अपने ही ऊपर ज़ुल्म किया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 177 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 177 की तफ़्सीर

✅ [409] बुरी मिसाल

जो लोग अल्लाह की आयतों को न मानें और उन्हें झुठलाएँ, उनकी मिसाल सबसे बदतर है।

✅ [410] अपने ऊपर ज़ुल्म

ऐसे लोग दूसरों का नहीं बल्कि सबसे ज़्यादा अपना नुकसान करते हैं। क्योंकि अल्लाह की हिदायत छोड़कर वे अपने लिए अज़ाब तय कर लेते हैं।

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