Transliteration: (Mai yahdil laahu fa huwal muhtadee wa mai yudlil fa ulaaa'ika humul khaasiroon)
सच्ची हिदायत सिर्फ़ अल्लाह की रहमत से मिलती है। इंसान की अक़्ल, इल्म या तजुर्बा तब तक फ़ायदे मंद नहीं जब तक अल्लाह की मदद और रहमत शामिल न हो।
जो लोग अपने दिल में बुराई और हठधर्मी रखते हैं, अल्लाह उन्हें उनके हाल पर छोड़ देता है। यही उनकी असली गुमराही है, और यही उन्हें दुनिया और आख़िरत में घाटा उठाने वालों में बना देती है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat