कुरान - 7:178 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

178
مَن يَهۡدِ ٱللَّهُ فَهُوَ ٱلۡمُهۡتَدِيۖ وَمَن يُضۡلِلۡ فَأُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ

Transliteration: (Mai yahdil laahu fa huwal muhtadee wa mai yudlil fa ulaaa'ika humul khaasiroon)

जिसे अल्लाह हिदायत दे, वही हिदायत पाने वाला है। और जिसे वह गुमराह कर दे, तो वही लोग नुकसान उठाने वाले हैं [409]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 178 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 178 की तफ़्सीर

✅ [409] हिदायत और गुमराही का मालिक अल्लाह

सच्ची हिदायत सिर्फ़ अल्लाह की रहमत से मिलती है। इंसान की अक़्ल, इल्म या तजुर्बा तब तक फ़ायदे मंद नहीं जब तक अल्लाह की मदद और रहमत शामिल न हो।
जो लोग अपने दिल में बुराई और हठधर्मी रखते हैं, अल्लाह उन्हें उनके हाल पर छोड़ देता है। यही उनकी असली गुमराही है, और यही उन्हें दुनिया और आख़िरत में घाटा उठाने वालों में बना देती है।

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