कुरान - 7:166 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

166
فَلَمَّا عَتَوۡاْ عَن مَّا نُهُواْ عَنۡهُ قُلۡنَا لَهُمۡ كُونُواْ قِرَدَةً خَٰسِـِٔينَ

Transliteration: (Falammaa 'ataw 'ammaa nuhoo 'anhu qulna lahum koonoo qiradatan khaasi'een)

फिर जब उन्होंने उस हुक्म से सरकशी की जो उन्हें दिया गया था, तो हमने उनसे कहा – "ज़लील बंदर बन जाओ" [379]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 166 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-आ‘राफ़ – आयत 166 की तफ़्सीर

✅ [379] बाहरी शक्ल की तब्दीली, न कि पुनर्जन्म

इस आयत में उन गुनहगारों का ज़िक्र है जिन्हें अल्लाह तआला ने बंदरों में तब्दील कर दिया।

  • लेकिन यह तब्दीली सिर्फ़ उनकी बाहरी शक्ल व सूरत की थी।
  • उनके जिस्म के अंदरूनी अज्हा, इंसानी क़ुव्वतें और रूह जस की तस बाक़ी रही।
  • इस वाक़े से आर्य या पुनर्जन्म के अक़ीदे को कोई सबूत नहीं मिलता, क्योंकि उसमें तो रूह और जिस्म दोनों की तब्दीली मानी जाती है, जबकि इस्लाम में रूह की तब्दीली नामुमकिन है।

यह हुक्म उसी तरह का एक इलाही मोज़िज़ा था, जैसा हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) का असा साँप बन गया था, या कुछ लोगों का ख़िन्ज़ीर (सूअर) में तब्दील कर दिया जाना। यह सब अल्लाह की क़ुदरत के ज़ाहिर होने की निशानियाँ हैं।

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