कुरान - 7:181 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

181
وَمِمَّنۡ خَلَقۡنَآ أُمَّةٞ يَهۡدُونَ بِٱلۡحَقِّ وَبِهِۦ يَعۡدِلُونَ

Transliteration: (Wa mimman khalaqnaaa ummatuny yahdoona bilhaqqi wa bihee ya'diloon)

और जिनको हमने पैदा किया है, उनमें से एक गिरोह ऐसा भी है जो हक़ के साथ राह दिखाता है और उसी के मुताबिक़ इन्साफ़ करता है [416]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 181 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 181 की तफ़्सीर

✅ [416] हक़ पर क़ायम लोगों की पहचान

इस आयत में उन चुने हुए लोगों का ज़िक्र है जो:

  1. हक़ पर चलते हैं और उसी की तरफ़ बुलाते हैं – वे केवल अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए भी हिदायत का ज़रिया बनते हैं।
  2. इन्साफ़ से काम लेते हैं – उनका हर फ़ैसला और अमल عدل और बराबरी पर आधारित होता है।
  3. हर दौर में बाक़ी रहते हैं – अल्लाह की मर्ज़ी से हमेशा ज़मीन पर एक ऐसा गिरोह मौजूद रहता है जो हक़ को ज़िंदा रखे।

ये लोग ही असल में अल्लाह की हिफ़ाज़त और नुसरत के हक़दार हैं, और गुमराह लोग कभी उन्हें नुक़सान नहीं पहुँचा सकते।

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