Transliteration: (A yushrikoona maa laa yakhluqu shai'anw wa hum yukhlaqoon)
यह आयत मूर्तिपूजा की तर्कहीनता को उजागर करती है। "पैदा करना" से आशय है किसी चीज़ को आकार देना या रूप देना। मूर्तियाँ इंसानों के हाथों बनाई जाती हैं, वे खुद कोई चीज़ पैदा नहीं कर सकतीं।
विडंबना यह है कि लोग उन्हीं बेजान वस्तुओं की पूजा करते हैं जिन्हें उन्होंने स्वयं गढ़ा है। इन मूर्तियों में न तो चेतना होती है, न समझ, न इच्छा – फिर भी इन्हें ऐसे पूजा जाता है मानो ये बुद्धिमान और शक्तिशाली हों।
क्योंकि बहुदेववादी इन मूर्तियों को बुद्धिमान मानते हैं, इसलिए आयत में "वे स्वयं पैदा किए गए हैं" जैसे बहुवचन शब्दों का प्रयोग हुआ है, जिससे उनके भ्रम की झलक मिलती है।
हालाँकि, कुरआन ने उन मूर्तियों को अबुद्धिमान वस्तुएँ मानकर ही संबोधित किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह उनके भ्रम का चित्रण है, न कि किसी प्रकार की पुष्टि।
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