कुरान - 7:193 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

193
وَإِن تَدۡعُوهُمۡ إِلَى ٱلۡهُدَىٰ لَا يَتَّبِعُوكُمۡۚ سَوَآءٌ عَلَيۡكُمۡ أَدَعَوۡتُمُوهُمۡ أَمۡ أَنتُمۡ صَٰمِتُونَ

Transliteration: (Wa in tad'oohum ilalhudaa laa yattabi'ookum; sawaaa'un 'alaikum a-da'awtumoohum 'am antum saamitoon)

और यदि आप उन्हें मार्गदर्शन की ओर बुलाएँ, तो वे आपका पालन नहीं करेंगे। आपके लिए इसमें कोई अंतर नहीं कि आप उन्हें बुलाएँ या मौन रहें [446] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 193 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आराफ़ – आयत 193 की तफ़्सीर

 

✅ [446] निर्जीव मूर्तियाँ – प्रतिक्रिया या मार्गदर्शन में असमर्थ

यह आयत मूर्तियों की पूरी अनुत्तरदायी प्रकृति को स्पष्ट करती है। चाहे कोई उन्हें कितना भी बुलाए, वे न पालन कर सकती हैं, न बोल सकती हैं, न चल सकती हैं, न समझ सकती हैं।
उनमें सुनने, चलने या समझने की मूलभूत क्षमता भी नहीं है। इसलिए, आप चाहे उन्हें बुलाएँ या चुप रहें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता – उनकी असमर्थता पूर्ण है।

यह अल्लाह की शक्ति के विपरीत एक तीव्र अंतर को उजागर करता है। अल्लाह अदृश्य हैं, फिर भी उनके अस्तित्व और शक्ति के संकेत उनके सृजन में प्रकट होते हैं, जबकि ये निर्जीव वस्तुएँ दिखाई देने के बावजूद किसी शक्ति या पूजा योग्य नहीं हैं।

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