Transliteration: ('A lahum arjuluny yamshoona bihaa 'am lahum 'aidiny yabtishoona bihaaa 'am lahum a'yunuy yubsiroona bihaaa 'am lahum aazaanuny yasma'oona bihaa; qulid'oo shurakaaa'akum thumma keedooni falaa tunziroon)
इस आयत में सवालों के ज़रिये बताया गया है कि ये मूर्तियाँ और बुत न तो चल सकते हैं, न पकड़ सकते हैं, न देख सकते हैं और न सुन सकते हैं। जबकि इंसान और जानवरों में ये क्षमताएँ मौजूद हैं। इससे साफ़ साबित होता है कि पत्थरों और पेड़ों की बनी हुई मूर्तियाँ इबादत के बिल्कुल लायक नहीं हैं।
इसके बाद नबी ﷺ की ओर से खुली चुनौती दी गई कि तुम अपने सारे साझीदार बुला लो और मुझ पर हमला कर लो, मुझे ज़रा भी मोहलत मत दो। यह नबियों की वह बहादुरी है जो अल्लाह उन्हें देता है, जिससे वे पूरी क़ौम और ग़लत निज़ाम के सामने भी अकेले डटे रहते हैं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat