कुरान - 7:195 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

195
أَلَهُمۡ أَرۡجُلٞ يَمۡشُونَ بِهَآۖ أَمۡ لَهُمۡ أَيۡدٖ يَبۡطِشُونَ بِهَآۖ أَمۡ لَهُمۡ أَعۡيُنٞ يُبۡصِرُونَ بِهَآۖ أَمۡ لَهُمۡ ءَاذَانٞ يَسۡمَعُونَ بِهَاۗ قُلِ ٱدۡعُواْ شُرَكَآءَكُمۡ ثُمَّ كِيدُونِ فَلَا تُنظِرُونِ

Transliteration: ('A lahum arjuluny yamshoona bihaa 'am lahum 'aidiny yabtishoona bihaaa 'am lahum a'yunuy yubsiroona bihaaa 'am lahum aazaanuny yasma'oona bihaa; qulid'oo shurakaaa'akum thumma keedooni falaa tunziroon)

क्या इनके पाँव हैं जिनसे ये चल सकें? या इनके हाथ हैं जिनसे ये पकड़ सकें? या इनकी आँखें हैं जिनसे ये देख सकें? या इनके कान हैं जिनसे ये सुन सकें? कह दो: अपने साझीदारों को बुला लो और मुझ पर चालें चल लो और मुझे कोई मोहलत न दो [450]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 195 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 195 की तफ़्सीर

✅ [449] बेजान मूर्तियों में कोई ताक़त नहीं

इस आयत में सवालों के ज़रिये बताया गया है कि ये मूर्तियाँ और बुत न तो चल सकते हैं, न पकड़ सकते हैं, न देख सकते हैं और न सुन सकते हैं। जबकि इंसान और जानवरों में ये क्षमताएँ मौजूद हैं। इससे साफ़ साबित होता है कि पत्थरों और पेड़ों की बनी हुई मूर्तियाँ इबादत के बिल्कुल लायक नहीं हैं।

✅ [450] नबूवी बहादुरी और झूठी ताक़तों को चुनौती

इसके बाद नबी ﷺ की ओर से खुली चुनौती दी गई कि तुम अपने सारे साझीदार बुला लो और मुझ पर हमला कर लो, मुझे ज़रा भी मोहलत मत दो। यह नबियों की वह बहादुरी है जो अल्लाह उन्हें देता है, जिससे वे पूरी क़ौम और ग़लत निज़ाम के सामने भी अकेले डटे रहते हैं।

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