कुरान - 7:26 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
يَٰبَنِيٓ ءَادَمَ قَدۡ أَنزَلۡنَا عَلَيۡكُمۡ لِبَاسٗا يُوَٰرِي سَوۡءَٰتِكُمۡ وَرِيشٗاۖ وَلِبَاسُ ٱلتَّقۡوَىٰ ذَٰلِكَ خَيۡرٞۚ ذَٰلِكَ مِنۡ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ لَعَلَّهُمۡ يَذَّكَّرُونَ

Transliteration: (Yaa Baneee Aadama qad anzalnaa 'alaikum libaasany yuwaaree saw aatikum wa reeshanw wa libaasut taqwaa zaalika khair; zaalika min Aayaatil laahi la'allahum yaz zakkaroon)

ऐ आदम की औलाद! बेशक हमने तुम्हारे लिए लिबास उतारा, जो तुम्हारी शर्मगाहों को ढाँपे [48] और तुम्हारे लिए ज़ीनत (सिंगार) का ज़रिया हो। और परहेज़गारी का लिबास — वही सबसे बेहतर है [49]। यह अल्लाह की निशानियों में से है, ताकि वे नसीहत हासिल करें. (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 26 की तफ़्सीर

 

✅ [48] लिबास इंसानों के लिए खास तौर पर बनाया गया

इससे मालूम होता है कि लिबास की तख़लीक़ खास तौर पर इंसानों के लिए हुई है। फ़रिश्तों और अल्लाह की दूसरी मख़लूक़ात इसके दायरे में नहीं आतीं।
अगर जिन्न लिबास पहनते हैं, तो वह इंसानों की नकल या असर की वजह से है।
यह भी वाज़ेह है कि शर्मगाह ढाँपने के लिए कपड़े पहनना वाजिब है, और ज़ीनत व खूबसूरती के लिए पहनना मुस्तहब व पसंदीदा है।

✅ [49] सबसे बेहतरीन लिबास — तक़्वा का लिबास

इससे मुराद यह है कि अल्लाह तआला ने इंसानों के लिए तीन तरह के लिबास नाज़िल किए हैं — दो जिस्मानी, एक रूहानी।
जिस्मानी लिबास में एक है जो शर्मगाह ढाँपने के लिए है, और दूसरा ज़ीनत व खूबसूरती के लिए — दोनों जायज़ और मुफ़ीद हैं।
रूहानी लिबास से मुराद है — ईमान, तक़्वा और नेक अमल।
ये तीनों लिबास आसमानी ही हैं:
ऊन, कपास और रेशम ज़मीन से उगते हैं मगर बारिश की बरकत से, जो आसमान से उतरती है।
तक़्वा भी वही वही का नतीजा है, जो अल्लाह के करम से आसमान से उतरती है।

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