कुरान - 7:28 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
وَإِذَا فَعَلُواْ فَٰحِشَةٗ قَالُواْ وَجَدۡنَا عَلَيۡهَآ ءَابَآءَنَا وَٱللَّهُ أَمَرَنَا بِهَاۗ قُلۡ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَأۡمُرُ بِٱلۡفَحۡشَآءِۖ أَتَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa izaa fa'aloo faahishatan qaaloo wajadnaa 'alaihaaa aabaaa'ana wallaahu amaranaa bihaa; qul innal laaha laa ya'muru bilfahshaaa'i a-taqooloona 'alal laahi maa laa ta'lamoon)

और जब वे कोई बेहयाई का काम करते हैं तो कहते हैं: 'हमने अपने बाप-दादा को इसी पर पाया है और अल्लाह ने हमें इसका हुक्म दिया है'; कह दीजिए: 'बेशक अल्लाह कभी बेहयाई का हुक्म नहीं देता; क्या तुम अल्लाह के ज़िम्मे ऐसी बात कहते हो जिसका तुम्हें इल्म नहीं?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 28

✅ मुशरिकीन की बेहयाई और बातिल दलील

मुशरिकीन ख़ाना-ए-काबा का नंगा होकर तवाफ़ करते थे और कहते थे कि यह हमारे बुज़ुर्गों का तरीक़ा और अल्लाह का हुक्म है। अल्लाह ने उनके इस बोहतान को रद्द फ़रमाया।

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