कुरान - 7:29 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
قُلۡ أَمَرَ رَبِّي بِٱلۡقِسۡطِۖ وَأَقِيمُواْ وُجُوهَكُمۡ عِندَ كُلِّ مَسۡجِدٖ وَٱدۡعُوهُ مُخۡلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَۚ كَمَا بَدَأَكُمۡ تَعُودُونَ

Transliteration: (Qul amara Rabbee bilqisti wa aqeemoo wujoohakum 'inda kulli masjidin wad'oohu mukhliseena lahud deen; kamaa bada akum ta'oodoon)

कह दीजिए: 'मेरे रब ने इन्साफ़ का हुक्म दिया है, और यह कि हर नमाज़ के वक़्त अपने रुख़ सीधे (अल्लाह की तरफ़) रखो और उसी को पुकारो अपनी इताअत को उसी के लिए ख़ालिस करते हुए; जिस तरह उसने तुम्हें पहली बार पैदा किया उसी तरह तुम दोबारा लौटोगे।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 29

✅ इन्साफ़, इख़्लास और दोबारा जी उठना

अल्लाह ने अदल व इन्साफ़, इबादत में इख़्लास और कामिल यकसूई का हुक्म दिया और दोबारा ज़िंदा किए जाने की हक़ीक़त को याद दिलाया।

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