कुरान - 7:30 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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فَرِيقًا هَدَىٰ وَفَرِيقًا حَقَّ عَلَيۡهِمُ ٱلضَّلَٰلَةُۚ إِنَّهُمُ ٱتَّخَذُواْ ٱلشَّيَٰطِينَ أَوۡلِيَآءَ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَيَحۡسَبُونَ أَنَّهُم مُّهۡتَدُونَ

Transliteration: (Fareeqan hadaa wa fareeqan haqqa 'alaihimud dalaalah; innahumut takhazush Shayaateena awliyaaa'a min doonil laahi wa yahsaboona annahum muhtadoon)

एक गिरोह को उसने हिदायत दी और एक गिरोह पर गुमराही साबित हो गई; बेशक उन्होंने अल्लाह को छोड़कर शैतानों को अपना कारसाज़ बना लिया और वे समझते हैं कि वे सही राह पर हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 30

✅ हिदायत और गुमराही का अंजाम

जो लोग शैतानों की पैरवी करते हैं वे मुकम्मल तौर पर गुमराह हो जाते हैं और अपनी गुमराही को ही हिदायत समझने का भयानक मुग़ालता पाल लेते हैं।

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