कुरान - 7:31 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
۞يَٰبَنِيٓ ءَادَمَ خُذُواْ زِينَتَكُمۡ عِندَ كُلِّ مَسۡجِدٖ وَكُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ وَلَا تُسۡرِفُوٓاْۚ إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُسۡرِفِينَ

Transliteration: (Yaa Banneee Adama khuzoo zeenatakum 'inda kulli masjidinw wa kuloo washraboo wa laa tusrifoo; innahoo laa yuhibbul musrifeen)

ऐ आदम की औलाद! हर नमाज़ (और इबादत) के वक़्त अपनी ज़ीनत (पाकीज़ा लिबास) ले लिया करो, और खाओ और पियो और फ़िज़ूलख़र्ची न करो; बेशक वह फ़िज़ूलख़र्ची करने वालों को पसंद नहीं करता। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 31

✅ पाकीज़ा लिबास और इसराफ़ की मुमानअत

इबादत और नमाज़ के वक़्त साफ़-सुथरा और बा-वक़ार लिबास पहनना मुस्तहब है। खाने-पीने में एअतिदाल (बीच का रास्ता) इख़्तियार करने और हद से बढ़ने (फ़िज़ूलख़र्ची) से मना फ़रमाया गया।

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