कुरान - 7:32 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
قُلۡ مَنۡ حَرَّمَ زِينَةَ ٱللَّهِ ٱلَّتِيٓ أَخۡرَجَ لِعِبَادِهِۦ وَٱلطَّيِّبَٰتِ مِنَ ٱلرِّزۡقِۚ قُلۡ هِيَ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا خَالِصَةٗ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۗ كَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ ٱلۡأٓيَٰتِ لِقَوۡمٖ يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Qul man harrama zeenat Allahil lateee akhraja li'ibaadihee wattaiyibaati minar rizq; qul hiya lillazeena aamanoo fil hayaatid dunyaa khaalisatany Yawmal Qiyaamah; kazaalika nufassilul Aayaati li qawminy ya'lamoon)

कह दीजिए: 'किसने अल्लाह की उस ज़ीनत को हराम किया है जो उसने अपने बंदों के लिए निकाली है और पाकीज़ा रोज़ियों को?' कह दीजिए: 'ये चीज़ें दुनियावी ज़िंदगी में मोमिनों के लिए हैं और क़यामत के दिन तो ख़ालिस उन्हीं के लिए होंगी'; इसी तरह हम अपनी आयतें उन लोगों के लिए खोल-खोलकर बयान करते हैं जो इल्म रखते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 32

✅ हलाल ज़ीनत और नेअमतों की हिल्लत

अल्लाह ने अपने बंदों के लिए उम्दा लिबास, ज़ीनत और हलाल तय्यिब ग़िज़ाएं पैदा की हैं। इन्हें बिला-वजह हराम ठहराना जाहिलाना रस्म है; मोमिनों के लिए ये नेअमतें आख़िरत में ख़ालिस होंगी।

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