कुरान - 7:34 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَلِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٞۖ فَإِذَا جَآءَ أَجَلُهُمۡ لَا يَسۡتَأۡخِرُونَ سَاعَةٗ وَلَا يَسۡتَقۡدِمُونَ

Transliteration: (Wa likulli ummatin ajalun fa izaa jaaa'a ajaluhum laa yasta' khiroona saa'atanw wa laa yastaqdimoon)

और हर उम्मत के लिए एक मुक़र्ररा मुद्दत है; पस जब उनकी मुद्दत आ पहुंचती है तो वे न एक घड़ी पीछे हट सकते हैं और न आगे बढ़ सकते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 34

✅ हर क़ौम की अजल मुक़र्रर

क़ौमों के उरूज व ज़वाल और उनकी मोहलत का एक वक़्त मुक़र्रर है; जब अल्लाह का अज़ाब आता है तो एक लम्हे की भी ताख़ीर या तक़दीम नहीं होती।

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