कुरान - 7:36 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
وَٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَٱسۡتَكۡبَرُواْ عَنۡهَآ أُوْلَـٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ

Transliteration: (Wallazeena kazzaboo bi Aayaatinaa wastakbaroo 'an haaa ulaaa'ika Ashaabun naari hum feehaa khaalidoon)

और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और उनसे तकब्बुर किया, वही दोज़ख़ वाले हैं; वे उसमें हमेशा रहेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 36

✅ तकब्बुर और तकज़ीब का अंजाम

अल्लाह की आयतों के मुक़ाबले में घमंड करने और उन्हें झुठलाने वाले दोज़ख़ के हमेशा रहने वाले अज़ाब में गिरफ़्तार होंगे।

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