कुरान - 7:58 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
وَٱلۡبَلَدُ ٱلطَّيِّبُ يَخۡرُجُ نَبَاتُهُۥ بِإِذۡنِ رَبِّهِۦۖ وَٱلَّذِي خَبُثَ لَا يَخۡرُجُ إِلَّا نَكِدٗاۚ كَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ ٱلۡأٓيَٰتِ لِقَوۡمٖ يَشۡكُرُونَ

Transliteration: (Walbaladut taiyibu yakhruju nabaatuhoo bi-izni Rabbihee wallazee khabusa laa yakhruju illaa nakidaa; kazaalika nusarriful Aayaati liqawminy yashkuroon)

और जो पाकीज़ा ज़मीन है उसकी नबातात उसके रब के हुक्म से ख़ूब निकलती है, और जो ज़मीन ख़राब है उससे मामूली चीज़ के सिवा कुछ नहीं निकलता; इसी तरह हम उन लोगों के लिए निशानियां बार-बार फेरते हैं जो शुक्र अदा करते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 58

✅ नेक और बद दिलों की मिसाल

ज़मीन की तरह इंसान का दिल भी होता है; साफ़-सुथरा दिल वह्य-ए-इलाही की बारिश से हिकमत व नेकियों के फल देता है, जबकि खोटा दिल हिदायत से महरूम रहता है।

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