कुरान - 7:57 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
وَهُوَ ٱلَّذِي يُرۡسِلُ ٱلرِّيَٰحَ بُشۡرَۢا بَيۡنَ يَدَيۡ رَحۡمَتِهِۦۖ حَتَّىٰٓ إِذَآ أَقَلَّتۡ سَحَابٗا ثِقَالٗا سُقۡنَٰهُ لِبَلَدٖ مَّيِّتٖ فَأَنزَلۡنَا بِهِ ٱلۡمَآءَ فَأَخۡرَجۡنَا بِهِۦ مِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِۚ كَذَٰلِكَ نُخۡرِجُ ٱلۡمَوۡتَىٰ لَعَلَّكُمۡ تَذَكَّرُونَ

Transliteration: (Wa Huwal lazee yursilur riyaaha bushram baina yadai rahmatihee hattaaa izaaa aqallat sahaaban siqaalan suqnaahu libaladim maiyitin fa annzalnaa bihil maaa'a fa akhrajnaa bihee minn kullis samaraat; kazaalika nukhrijul mawtaa la'allakum tazakkaroon)

और वही है जो अपनी रहमत (बारिश) से पहले हवाओं को ख़ुशख़बरी बनाकर भेजता है; यहां तक कि जब वे भारी बादलों को उठा लाती हैं तो हम उसे किसी मुर्दा शहर की तरफ़ हांक ले जाते हैं, फिर उससे पानी बरसाते हैं, फिर उसके ज़रिए हर क़िस्म के फल निकालते हैं; इसी तरह हम मुर्दों को (क़ब्रों से) निकालेंगे ताकि तुम नसीहत हासिल करो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 57

✅ बादलों की आमद और हश्र की दलील

ठंडी हवाएं, बादलों का बरसना और मुर्दा ज़मीन से फलों का उगना इस बात की खुली दलील है कि अल्लाह इसी तरह क़यामत के दिन मुर्दों को दोबारा ज़िंदा फ़रमाएगा।

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