कुरान - 7:56 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
وَلَا تُفۡسِدُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ بَعۡدَ إِصۡلَٰحِهَا وَٱدۡعُوهُ خَوۡفٗا وَطَمَعًاۚ إِنَّ رَحۡمَتَ ٱللَّهِ قَرِيبٞ مِّنَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Wa laa tufsidoo fil ardi ba'da islaahihaa wad'oohu khawfanw wa tama'aa; inna rahmatal laahi qareebum minal muhsineen)

और ज़मीन में उसकी इस्लाह के बाद फ़साद न फैलाओ, और उससे डरो और (उसकी रहमत की) उम्मीद रखो; बेशक अल्लाह की रहमत नेकी करने वालों के बहुत क़रीब है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 56

✅ ज़मीन में फ़साद की मुमानअत और ख़ौफ़ व रजा

इस्लामी निज़ाम और अमन क़ायम होने के बाद जुर्म व फ़साद फैलाना सख़्त मना है। मोमिन की ज़िंदगी ख़ौफ़ और उम्मीद (ख़ौफ़ व रजा) के दरमियान होनी चाहिए।

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