कुरान - 7:55 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
ٱدۡعُواْ رَبَّكُمۡ تَضَرُّعٗا وَخُفۡيَةًۚ إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُعۡتَدِينَ

Transliteration: (Ud'oo Rabbakum tadarru'anw wa khufyah; innahoo laa yuhibbul mu'tadeen)

अपने रब को गिड़गिड़ाते हुए और चुपके-चुपके पुकारो; बेशक वह हद से बढ़ने वालों को पसंद नहीं करता। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 55

✅ आदाबे दुआ: तज़र्रोअ और ख़िफ़्या

दुआ मांगने का बेहतरीन तरीक़ा आजीज़ी, इनकिसारी और चुपके-चुपके (धीमी आवाज़ से) दुआ मांगना है। चिल्लाना या दुआ में बेजा हद से बढ़ना नापसंदीदा है।

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