कुरान - 7:61 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
قَالَ يَٰقَوۡمِ لَيۡسَ بِي ضَلَٰلَةٞ وَلَٰكِنِّي رَسُولٞ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Qaala yaa qawmi laisa bee dalaalatunw wa laakinnee Rasoolum mir Rabbil 'aalameen)

उन्होंने कहा: 'ऐ मेरी क़ौम! मुझमें कोई गुमराही नहीं है बल्कि मैं तो तमाम जहानों के रब का भेजा हुआ रसूल हूं।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 61

✅ नबी का सब्र और रिसालत का एलान

हज़रत नूह (अलै.) ने निहायत हिल्म व सब्र से जवाब दिया कि मैं गुमराह नहीं बल्कि रब्बुल आलमीन का सच्चा पैग़म्बर हूं।

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