कुरान - 7:63 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
أَوَعَجِبۡتُمۡ أَن جَآءَكُمۡ ذِكۡرٞ مِّن رَّبِّكُمۡ عَلَىٰ رَجُلٖ مِّنكُمۡ لِيُنذِرَكُمۡ وَلِتَتَّقُواْ وَلَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ

Transliteration: (Awa 'ajibtum an jaaa'akum zikrum mir Rabbikum 'alaa rajulim minkum liyunzirakum wa litattaqoo wa la'allakum turhamoon)

'क्या तुम्हें इस बात पर ताज्जुब हुआ कि तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम्हीं में से एक मर्द के ज़रिए नसीहत आई ताकि वह तुम्हें डराए और ताकि तुम परहेज़गार बनो और ताकि तुम पर रहम किया जाए?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 63

✅ बशरी रसूल पर ताज्जुब की तरदीद

इंसानों की रहनुमाई के लिए इंसान ही रसूल बनकर आता है ताकि लोग आसानी से उसकी पैरवी कर सकें; इसमें ताज्जुब की कोई बात नहीं।

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