कुरान - 7:62 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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أُبَلِّغُكُمۡ رِسَٰلَٰتِ رَبِّي وَأَنصَحُ لَكُمۡ وَأَعۡلَمُ مِنَ ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Uballighukum Risaalaati Rabbee wa ansahu lakum wa a'lamu minal laahi maa laa ta'lamoon)

'मैं तुम्हें अपने रब के पैग़ामात पहुंचाता हूं और तुम्हारी ख़ैरख़्वाही करता हूं, और मैं अल्लाह की तरफ़ से वह बातें जानता हूं जो तुम नहीं जानते।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 62

✅ तबलीग़ और ख़ैरख़्वाही का जज़्बा

पैग़म्बर का मक़सद अपनी क़ौम की भलाई और अल्लाह की वह्य को अमानतदारी के साथ पहुंचाना होता है।

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