कुरान - 7:73 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

73
وَإِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمۡ صَٰلِحٗاۚ قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥۖ قَدۡ جَآءَتۡكُم بَيِّنَةٞ مِّن رَّبِّكُمۡۖ هَٰذِهِۦ نَاقَةُ ٱللَّهِ لَكُمۡ ءَايَةٗۖ فَذَرُوهَا تَأۡكُلۡ فِيٓ أَرۡضِ ٱللَّهِۖ وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوٓءٖ فَيَأۡخُذَكُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ

Transliteration: (Wa ilaa Samooda akhaahum Saalihaa; qaala yaa qawmi' budul laaha maa lakum min ilaahin ghairuhoo qad jaaa'atkum baiyinatum mir Rabbikum haazihee naaqatul laahi lakum Aayatan fazaroohaa ta'kul feee ardil laahi wa laa tamassoohaa bisooo'in fa ya'khuzakum 'azaabun aleem)

और क़ौमे समूद की तरफ़ उनके भाई सालेह को भेजा; उन्होंने कहा: 'ऐ मेरी क़ौम! अल्लाह की इबादत करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं; बेशक तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से वाज़ेह निशानी आ चुकी है; यह अल्लाह की ऊंटनी तुम्हारे लिए एक निशानी है, पस इसे छोड़ दो कि अल्लाह की ज़मीन में चरती फिरे और इसे कोई बुराई न पहुंचाना वरना तुम्हें दर्दनाक अज़ाब आ पकड़ेगा।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 73 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 73

✅ हज़रत सालेह (अलै.) और अल्लाह की ऊंटनी

हज़रत सालेह (अलै.) के मोजिज़े के तौर पर चट्टान से एक निहायत अज़ीम ऊंटनी निकली जो अल्लाह की क़ुदरत की खुली निशानी थी; उन्हें ऊंटनी को तकलीफ़ पहुंचाने से मना किया गया था।

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