कुरान - 7:71 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

71
قَالَ قَدۡ وَقَعَ عَلَيۡكُم مِّن رَّبِّكُمۡ رِجۡسٞ وَغَضَبٌۖ أَتُجَٰدِلُونَنِي فِيٓ أَسۡمَآءٖ سَمَّيۡتُمُوهَآ أَنتُمۡ وَءَابَآؤُكُم مَّا نَزَّلَ ٱللَّهُ بِهَا مِن سُلۡطَٰنٖۚ فَٱنتَظِرُوٓاْ إِنِّي مَعَكُم مِّنَ ٱلۡمُنتَظِرِينَ

Transliteration: (Qaala qad waqa'a alaikum mir Rabbikum rijsunw wa ghadab, atujaadiloonanee feee asmaaa'in sammaitumoohaaa antum wa aabaaa'ukum maa nazzalal laahu bihaa min sultaan; fantazirooo innee ma'akum minal muntazireen)

उन्होंने कहा: 'यक़ीनन तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम पर अज़ाब और ग़ज़ब साबित हो चुका है; क्या तुम मुझसे उन नामों के बारे में झगड़ते हो जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं जिनकी अल्लाह ने कोई सनद नाज़िल नहीं की? तो इंतिज़ार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतिज़ार करने वालों में से हूं।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 71 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 71

✅ ग़ज़बे इलाही का इंतिज़ार

हज़रत हूद (अलै.) ने साफ़ फ़रमाया कि जिन बुतों की तुम पूजा करते हो वे महज़ फ़र्ज़ी नाम हैं; अब जब तुम अज़ाब ही चाहते हो तो अल्लाह के फ़ैसले का इंतिज़ार करो।

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