कुरान - 7:74 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
وَٱذۡكُرُوٓاْ إِذۡ جَعَلَكُمۡ خُلَفَآءَ مِنۢ بَعۡدِ عَادٖ وَبَوَّأَكُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ تَتَّخِذُونَ مِن سُهُولِهَا قُصُورٗا وَتَنۡحِتُونَ ٱلۡجِبَالَ بُيُوتٗاۖ فَٱذۡكُرُوٓاْ ءَالَآءَ ٱللَّهِ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ

Transliteration: (Wazkuroo iz ja'alakum khulafaaa'a mim ba'di 'Aadinw wa bawwa akum fil ardi tattakhizoona min suhoolihaa qusooranw wa tanhitoonal jibaala buyootan fazkurooo aalaaa'al laahi wa laa ta'saw fil ardi mufsideen)

'और याद करो जब उसने तुम्हें आद के बाद जानशीन बनाया और ज़मीन में तुम्हें ठिकाना दिया कि तुम उसके मैदानों में महल बनाते हो और पहाड़ों को तराश कर घर बनाते हो; पस अल्लाह की नेअमतों को याद करो और ज़मीन में फ़साद मचाते न फिरो।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 74

✅ समूद की तराशी हुई बस्तियां (मदाइन सालेह)

क़ौमे समूद पहाड़ों को तराश कर आलीशान इमारतें बनाती थी; नबी ने उन्हें नेअमतों की क़द्र करने और फ़साद न फैलाने की नसीहत फ़रमाई।

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