कुरान - 2:103 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

103
وَلَوۡ أَنَّهُمۡ ءَامَنُواْ وَٱتَّقَوۡاْ لَمَثُوبَةٞ مِّنۡ عِندِ ٱللَّهِ خَيۡرٞۚ لَّوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa law annahum aamanoo wattaqaw lamasoobatum min 'indillaahi khairun law kaanoo ya'lamoon)

"और अगर वो ईमान लाते और अल्लाह से डरते, तो अल्लाह की तरफ़ से जो सवाब मिलता वो ज़्यादा बेहतर होता [202], काश वो जानते।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 103 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[202] ईमान और तक़वा की असली क़ीमत

  • इस आयत में बताया गया है कि असल इनाम और कामयाबी किसमें है?
    जवाब: ईमान (यक़ीन) और तक़वा (अल्लाह से डरना, परहेज़गारी)।
  • अगर लोग जादू, कुफ़्र, और शैतानी रास्तों के बजाय ईमान और अल्लाह की याद को चुनते,
    तो उन्हें बेहद बड़ा इनाम मिलता — जो दुनिया की हर चीज़ से बेहतर होता।

🕊️ एहम बात:
"आख़िरत की सबसे छोटी नेमत भी दुनिया की सबसे बड़ी नेमत से बेहतर है।"

  • ये इस तरफ़ इशारा करता है कि चाहे दुनिया में ताक़त, जादू, या छुपा हुआ इल्म मिल जाए —
    मगर वो सब अख़िरत की रहमत और सवाब के सामने कुछ भी नहीं।

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