कुरान - 2:104 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

104
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَقُولُواْ رَٰعِنَا وَقُولُواْ ٱنظُرۡنَا وَٱسۡمَعُواْۗ وَلِلۡكَٰفِرِينَ عَذَابٌ أَلِيمٞ

Transliteration: (Yaaa ayyuhal lazeena aamanoo laa taqooloo raa'inaa wa qoolun zurnaa wasma'oo; wa lilkaafireena 'azaabun aleem)

ऐ ईमान वालो! (रसूलुल्लाह की बारगाह में) 'राइना' न कहा करो बल्कि 'उनज़ुरना' कहा करो और (उनकी बात) ध्यान से सुनो; और काफ़िरों के लिए दर्दनाक अज़ाब है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 104 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-बक़रह - आयत 104

✅ आदाबे नबवी और लफ़्ज़े 'राइना' की मुमानअत

यहूदी लफ़्ज़ 'राइना' (हमारी रियायत कीजिए) को ज़बान मोड़कर तौहीन के मअनी में इस्तेमाल करते थे। अल्लाह ने मोमिनीन को हुक्म दिया कि वे ऐसा लफ़्ज़ छोड़ें जिसमें बेअदबी का शुबहा हो, और इसके बजाय बा-अदब लफ़्ज़ 'उनज़ुरना' (हम पर नज़र-ए-इनायत फ़रमाइए) कहें।

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