कुरान - 2:105 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

105
مَّا يَوَدُّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِنۡ أَهۡلِ ٱلۡكِتَٰبِ وَلَا ٱلۡمُشۡرِكِينَ أَن يُنَزَّلَ عَلَيۡكُم مِّنۡ خَيۡرٖ مِّن رَّبِّكُمۡۚ وَٱللَّهُ يَخۡتَصُّ بِرَحۡمَتِهِۦ مَن يَشَآءُۚ وَٱللَّهُ ذُو ٱلۡفَضۡلِ ٱلۡعَظِيمِ

Transliteration: (Maa yawaddul lazeena kafaroo min ahlil kitaabi wa lal mushrikeena ai-yunazzala 'alaikum min khairim mir Rabbikum; wallaahu yakhtassu birahmatihee mai-yashaaa; wallaahu zul fadlil'azeem)

अहले किताब में से कुफ़्र करने वाले और मुशरिकीन यह पसंद नहीं करते कि तुम्हारे रब की तरफ़ से तुम पर कोई भलाई (वह्य व रिसालत) नाज़िल हो; और अल्लाह अपनी रहमत के लिए जिसे चाहता है ख़ास कर लेता है, और अल्लाह बड़े फ़ज़्ल वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 105 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-बक़रह - आयत 105

✅ यहूद व मुशरिकीन का बुग़्ज़

यहूदी और मुशरिक मुसलमानों से हसद करते थे कि नुबुव्वत और क़ुरआन अरबों में हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) पर क्यों नाज़िल हुआ। अल्लाह जिसे चाहे अपने फ़ज़्ल व रहमत के लिए मुंतख़ब फ़रमाता है।

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