Transliteration: (Alam ta'lam annallaaha lahoo mulkus samaawaati wal ard; wa maa lakum min doonil laahi minw waliyyinw wa laa naseer)
📌 सीख:
ये आयत इंसानों को तफ़क्कुर (ग़ौर) की दावत देती है — कि अल्लाह जिस चीज़ को चाहे,
जिस वक़्त चाहे, जिस तरह चाहे — अपने इख़्तियार से हुक्म करता है।
📖 अल्लाह फ़रमाता है:
"तुम्हारा दोस्त सिर्फ़ अल्लाह है, और उसका रसूल, और वो मोमिन जो नमाज़ क़ायम करते हैं..." (सूरह अल-मायदा 5:55)
इसलिए फर्क़ साफ़ समझना ज़रूरी है:
➤ "अल्लाह के सिवा दोस्त" = बुत, झूठे मददगार (जिन पर अल्लाह ने लानत भेजी)
➤ "अल्लाह के दोस्त" = पैग़म्बर, औलिया, सालेहीन (जो अल्लाह की मर्ज़ी से मदद करते हैं)
🔑 नुक्ता:
जो अल्लाह की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ मदद देने का दावा करे — वो ग़लत और बेअसर है।
मगर जो अल्लाह की मर्ज़ी से मदद करें, वो उसी का हिस्सा है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat