कुरान - 2:110 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

110
وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَۚ وَمَا تُقَدِّمُواْ لِأَنفُسِكُم مِّنۡ خَيۡرٖ تَجِدُوهُ عِندَ ٱللَّهِۗ إِنَّ ٱللَّهَ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٞ

Transliteration: (Wa aqeemus salaata wa aatuz zakaah; wa maa tuqaddimoo li anfusikum min khairin tajidoohu 'indal laah; innal laaha bimaa ta'maloona baseer)

"और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात अदा करो [217]। जो भलाई तुम अपने लिए आगे भेजोगे, तुम उसे अल्लाह के पास पाओगे [218]। बेशक अल्लाह तुम्हारे तमाम कामों को देख रहा है [219]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 110 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[217] नमाज़ की फज़ीलत ज़कात से ज़्यादा

  • इस आयत में पहले नमाज़, फिर ज़कात का ज़िक्र किया गया —
    जो यह इशारा करता है कि नमाज़ की अहमियत ज़कात से ज़्यादा है।
  • पूरी शरीअत ज़मीन पर नाज़िल हुई, लेकिन नमाज़ रसूलुल्लाह ﷺ को
    मे'राज की रात आसमानों में बतौर तोहफ़ा दी गई थी।

🕋 नमाज़ अल्लाह की तरफ़ से एक मुबारक सौग़ात है,
जिसके ज़रिए बंदा सीधा अल्लाह से रूहानी रिश्ता जोड़ता है।

[218] हर नेकी का बदला — आखिरत में हाज़िर मिलेगा

  • इस आयत से ये हकीकत सामने आती है कि जो भी भलाई और नेक काम
    इंसान दुनिया में करेगा — वो क़यामत के दिन उसके सामने मौजूद होगा:
    • या तो सीधा इनाम (reward) बनकर
    • या उससे भी बेहतर सिला बनकर

📖 हदीस में आता है कि:
"क़यामत के दिन नेकियाँ एक खूबसूरत शक्ल में इंसान के सामने आएँगी —
जो उसे दिली सुकून देंगी।"

[219] अल्लाह हर अमल को देख रहा है — और उसी का अजर देगा

  • इस आयत का इशारा है कि इनसान को वही सवाब मिलेगा,
    जो उसने अपनी ज़िंदगी में किया।
  • मौत के बाद अगर किसी की रूह इबादत करती है या क़ुरआन पढ़ती है,
    तो वो नया सवाब नहीं होता — जब तक कि वो अमल ज़िंदा रहते शुरू न किया गया हो।

🕊️ जारी रहनी वाली नेकी (सदक़ा-ए-जारीया) के मिसालें:

  • मस्जिद बनवाना
  • मदरसा क़ायम करना
  • इल्म फैलाने वाली किताब या तालीम देना

📌 ये सब नेकियाँ मौत के बाद भी सवाब देती हैं,
क्योंकि उन्हें ज़िंदगी में शुरू किया गया और लोगों को उनका फ़ायदा मिलता रहा।

🤲 और अगर कोई ज़िंदा इंसान, नेक अमल करके मरहूम की रूह को ईसाल-ए-सवाब करे,
तो उसे भी क़ुबूल किया जाता है — ये इस्लामी रवायत है और साबित अमल है।

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