Transliteration: (Wa iz ja'alnal Baita masaabatal linnaasi wa amnanw wattakhizoo mim Maqaami Ibraaheema musallaaa; wa 'ahidnaaa ilaaa Ibraaheema wa Ismaa'eela an tahhiraa Baitiya littaaa'ifeena wal'aakifeena warrukka'is sujood)
📖 सूरह अल-बक़रह – आयत 125
“और (याद करो) जब हमने उस घर (काबा) को लोगों के लिए वापसी और सुरक्षा का स्थान बनाया [251], और इब्राहीम का मक़ाम (खड़ा होने की जगह) नमाज़ के लिए मुक़र्रर किया [252]। और हमने इब्राहीम और इस्माईल से हुक्म दिया: 'मेरे घर को साफ़-सुथरा रखो उन लोगों के लिए जो तवाफ़ करते हैं, जो उसमें इबादत के लिए ठहरते हैं, और जो नमाज़ में रुकू और सिज्दा करते हैं [254]।'”
✅ [251] काबा – वापसी, इबादत और सुरक्षा का केन्द्र
इस आयत से हमें पता चलता है कि मुसलमान दुनिया भर से काबा की ओर मुड़ते हैं:
🕋 काबा एक पवित्र ठिकाना है, जहाँ:
✅ [252] मक़ाम-ए-इब्राहीम – इबादत के लिए एक मुक़द्दस जगह
"मक़ाम-ए-इब्राहीम" वह पत्थर है जिस पर हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) काबा बनाते हुए खड़े थे। यह आज भी काबा के पास मौजूद है और बहुत पूजनीय है।
"नमाज़ का मक़ाम" का मतलब है:
🪨 मुख्य सबक:
✅ [253] काबा को साफ़-सुथरा रखने का हुक्म
हज़रत इब्राहीम और इस्माईल (अलैहिस्सलाम) को दिए गए इस हुक्म से हमें सीख मिलती है:
✅ [254] हरम शरीफ़ की पवित्रता की हिफाज़त
यह आयत हरम शरीफ़ (काबा) की पवित्रता बनाए रखने का स्पष्ट आदेश है, खासकर:
🕋 इससे हमें समझ आता है:
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