Transliteration: (Wa izaa laqul lazeena aamanoo qaalooo aamannaa wa izaa khalaw ilaa shayaateenihim qaalooo innaa ma'akum innamaa nahnu mustahzi'oon)
इस आयत से तीन अहम सबक सामने आते हैं:
अल्लाह के नज़दीक मुनाफ़िक़ शैतानों जैसे हैं।
जो लोग उनका अदब करते हैं या उनसे कोई फायदा चाहते हैं, वो असल में शैतान की इज़्ज़त कर रहे होते हैं।
यह मुनाफ़िक़ी की निशानी है कि मुसलमानों की बैठकों में पीठ पीछे गाली या मज़ाक किया जाए।
इस्लामी क़ानून या जो लोग उसे मानते हैं — उनका मज़ाक उड़ाना खुला कुफ्र (इनकार) है।
ऐसा मज़ाक इंसान को इस्लाम से बाहर कर देता है।
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