कुरान - 2:151 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

151
كَمَآ أَرۡسَلۡنَا فِيكُمۡ رَسُولٗا مِّنكُمۡ يَتۡلُواْ عَلَيۡكُمۡ ءَايَٰتِنَا وَيُزَكِّيكُمۡ وَيُعَلِّمُكُمُ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡحِكۡمَةَ وَيُعَلِّمُكُم مَّا لَمۡ تَكُونُواْ تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (kamaaa arsalnaa feekum Rasoolam minkum yatloo 'alaikum aayaatina wa yuzakkeekum wa yu'alli mukumul kitaaba wal hikmata wa yu'allimukum maa lam takoonoo ta'lamoon)

151."जिस तरह हमने तुम्हीं में से एक रसूल भेजा, जो तुम्हें हमारी आयतें सुनाता है और तुम्हें पाक करता है [318], और तुम्हें किताब और हिकमत सिखाता है [319], और तुम्हें वह कुछ सिखाता है जो तुम नहीं जानते थे [320]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 151 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[318] सबसे बड़ी नेमत — रसूल की आमद

  • इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमा रहा है कि हमने तुम्हें एक ऐसे रसूल अता किए जो तुम्हारे ही अंदर से हैं, यानी इंसानों में से हैं, ताकि तुम्हारे लिए समझना और अपनाना आसान हो।
  • अल्लाह ने सूरह आल-ए-इमरान (3:164) में भी फ़रमाया: "बेशक अल्लाह ने मोमिनों पर बहुत बड़ा फ़ज़्ल (इनायत/कृपा) किया जब उसने उन्हीं में से एक रसूल भेजा।"
  • यह बताता है कि रसूलुल्लाह ﷺ की आमद अल्लाह की सबसे बड़ी रहमत और इनायत है।
  • रसूल की ज़रिए क़ुरआन, उसकी तालीम और हिदायत लोगों तक पहुंची।
  • जो लोग रसूल से मुंह मोड़ते हैं, वो असल में क़ुरआन से भी दूर हो जाते हैं।

[319] तहज़ीब और पाकीज़गी की तालीम

  • आयत में फ़रमाया गया कि रसूल "तुम्हें पाक करता है" — इसका मतलब यह है कि सिर्फ अपने आमाल (कर्मों) से सफाई हासिल नहीं होती, बल्कि रसूल की तालीम और रहनुमाई से दिल और ज़िंदगी पाक होती है।
  • जैसे सूरह तौबा (9:103) में है:
    "(ऐ हबीब!) उनके मालों में से सदक़ा (ज़कात) ले लीजिए, जिससे आप उन्हें पाक करें और निखारें।"
  • ये साफ़ करता है कि हकीक़ी पाकीज़गी रसूल ﷺ के तआलिमात (शिक्षा) से आती है।

[320] नया इल्म और शरियत की मुकम्मल तालीम

  • रसूल ﷺ न सिर्फ़ वो बातें सिखाते हैं जो हम जानते हैं, बल्कि वो बातें भी सिखाते हैं जो हमें मालूम ही नहीं थीं।
  • इसका मतलब यह है कि रसूल को ग़ैब (unseen) का इल्म भी अल्लाह की तरफ़ से अता होता है, और वो ये इल्म सहाबा को भी सिखाते थे।
  • इस आयत के ज़रिए ये भी बताया गया कि रसूल ने मुकम्मल शरियत (दिव्य कानून) सिखाई।
  • क़ुरआन और हदीस मिलकर इस्लाम का पूरा ज़िंदगी गुज़ारने का उसूल बनते हैं, और ये दोनों रसूल ﷺ ने सिखाया।

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