कुरान - 2:17 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
مَثَلُهُمۡ كَمَثَلِ ٱلَّذِي ٱسۡتَوۡقَدَ نَارٗا فَلَمَّآ أَضَآءَتۡ مَا حَوۡلَهُۥ ذَهَبَ ٱللَّهُ بِنُورِهِمۡ وَتَرَكَهُمۡ فِي ظُلُمَٰتٖ لَّا يُبۡصِرُونَ

Transliteration: (Masaluhum kamasalillazis tawqada naaran falammaaa adaaa'at maa hawlahoo zahabal laahu binoorihim wa tarakahum fee zulumaatil laa yubsiroon)

17. उनकी मिसाल उस शख़्स की तरह है जिसने आग जलाई; फिर जब आग ने उसके चारों तरफ़ को रौशन कर दिया, अल्लाह ने उनका नूर छीन लिया और उन्हें अंधेरों में छोड़ दिया, जहाँ कुछ दिखाई नहीं देता [33]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[33] थोड़े वक़्ती फ़ायदे के बाद हमेशा का घाटा

इस तश्बीह (उदाहरण) में बताया गया है कि मुनाफ़िक़ों को दुनिया में थोड़ा सा वक़्ती फ़ायदा मिला — जैसे मुसलमानों के साथ दिखने पर हिफ़ाज़त और इज़्ज़त।
लेकिन आख़िरत (परलोक) में उन्हें पूरी रूहानी तारीकी (अंधेरा) मिलती है —
न कोई रौशनी, न हिदायत, न उम्मीद — सिर्फ़ सख़्त अज़ाब।

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