कुरान - 2:171 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

171
وَمَثَلُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ كَمَثَلِ ٱلَّذِي يَنۡعِقُ بِمَا لَا يَسۡمَعُ إِلَّا دُعَآءٗ وَنِدَآءٗۚ صُمُّۢ بُكۡمٌ عُمۡيٞ فَهُمۡ لَا يَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Wa masalul lazeena kafaroo kamasalil lazee yan'iqu bimaa laa yasma'u illaa du'aaa'anw wa nidaaa'aa; summum bukmun 'umyun fahum laa ya'qiloon)

"171. और जो लोग काफ़िर हैं, उनका उदाहरण ऐसे है जैसे कोई ऐसा शख़्स जो किसी ऐसी चीज़ को आवाज़ देता है जो केवल चीख़-पुकार सुनती है, लेकिन कुछ समझती नहीं। वे बहरے, बहरे और अंधे हैं, इसलिए वे नहीं समझते।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 171 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

काफ़िरों की मिसाल

  • यह आयत उन लोगों की मिसाल देती है जो अल्लाह की हिदायतों पर विश्वास नहीं करते।
  • उनकी हालत वैसी है जैसे कोई व्यक्ति ऐसी चीज़ से बात करता है जो सुन नहीं सकती—जिसका जवाब देना नामुमकिन है।
  • यह दर्शाता है कि उनका रास्ता पकड़ना और सही मार्ग पर चलना बेकार है।

बहरा, बहरा और अंधा होना

  • जैसे बहरे को आवाज़ सुनाई नहीं देती, बहरे से मतलब है कि वे बोल नहीं सकते, और अंधे को कुछ दिखायी नहीं देता, वैसे ही काफ़िरों का दिल और दिमाग़ बंद है।
  • वे हक़ीक़त और अल्लाह की राह को समझने में नाकाम हैं।

समझने की कमी

  • वे अल्लाह का पैग़ाम नहीं समझते क्योंकि उनके दिलों में अंधेरा है।
  • उन्हें सच्चाई जब भी समझाई जाए, वे उसे पहचान नहीं पाते।

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