Transliteration: (Laisal birra an tuwalloo wujoohakum qibalal mashriqi walmaghribi wa laakinnal birra man aamana billaahi wal yawmil aakhiri wal malaaa 'ikati wal kitaabi wan nabiyyeena wa aatalmaala 'alaa hubbihee zawilqurbaa walyataa maa walmasaakeena wabnas sabeeli wassaaa'ileena wa firriqaabi wa aqaamas salaata wa aataz zakaata walmoofoona bi ahdihim izaa 'aahadoo wasaabireena fil baasaaa'i waddarraaa'i wa heenal baas; ulaaa'ikal lazeena sadaqoo wa ulaaa 'ika humul muttaqoon)
सच्ची नेकी बाहरी इशारा नहीं
— यह इल्तिज़ाम साफ़ करता है कि नेकी सिर्फ क़िब्ला की तरफ़ मुख मोड़ देने जैसा नहीं, बल्कि दिल से की गई नेक नीयत और कर्म हैं।
ईमान का आधार — अल्लाह, आख़िरत, फ़रिश्ते, किताब और नबी
— सच्चा ईमान इसी को कहते हैं जिसमें ये पाँच मूल विश्वास शामिल हों—ये इमानी बुनियादों का खुबसूरत दस्तावेज़ है।
जरूरतमंदों को देना — रिश्तेदार, यतीम, मिस्कीन, मुसाफ़िर
— अल्लाह से इश्क़ में वह माल देना चाहिए जो इंसान को प्यारा हो, और उसे ख़ास नेकियत के साथ इन आठ शोहरती हस्तों पर झोंका जाए।
सवाल करने वालों की मांग पूरी करना
— चाहे कोई हक़दार हो या ना हो, जब किसी को ज़रूरत लगती है और वह पूछता है, तो देना नेक नीयत की निशानी है।
नमाज़ क़ायम करना
— सिर्फ नमाज़ पढ़ना ही काफी नहीं, बल्कि उसे टाइम पर, सच्चे दिल से और इख़लास के साथ अदा करना नेकी की असली झलक है।
ज़कात अदा करना
— ज़कात सिर्फ़ फ़र्ज़ नहीं, बल्कि अल्लाह का हुक्म और समाज में बराबरी की गारंटी है—it purifies wealth and souls.
वादा निभाना
— चाहे वो अल्लाह से हो या किसी इंसान से—वादा करना और उसे निभाना परहेज़गार की निशानी है।
सब्र करना — तंगी, मुसीबत, जिहाद
— ज़माने की कठिनाइयों या जिहादी संघर्ष में धैर्य रखना ही सच्चा कौसल है।
ये लोग सच्चे (सच्चे मोमिन)
— ऊपर बताई गयी बातों पर अमल करने वाले वही हक़ीक़त में मोमिन हैं।
ये लोग परहेज़गार (muttaqi)
— जो हर वक़्त अल्लाह को याद रखे और उससे डरते रहें—वही सच्चे परहेज़गार हैं।
तक़वा का खिताब
— इनकी पहचान है उनका अहसास, उनका डर और उसकी रस्मों में डूबना—तक़वा ही इनका मुकाम है।
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