कुरान - 2:230 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

230
فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُۥ مِنۢ بَعۡدُ حَتَّىٰ تَنكِحَ زَوۡجًا غَيۡرَهُۥۗ فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا جُنَاحَ عَلَيۡهِمَآ أَن يَتَرَاجَعَآ إِن ظَنَّآ أَن يُقِيمَا حُدُودَ ٱللَّهِۗ وَتِلۡكَ حُدُودُ ٱللَّهِ يُبَيِّنُهَا لِقَوۡمٖ يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Fa in tallaqahaa falaa tahillu lahoo mim ba'du hattaa tankiha zawjan ghairah; fa in tallaqahaa falaa junaaha 'alaihimaaa ai yataraaja'aaa in zannaaa ai yuqeemaa hudoodal laa; wa tilka hudoodul laahi yubaiyinuhaa liqawminy ya'lamoon)

230. फिर, यदि उसे तीसरी बार तलाक़ दे दिया गया [550], तो वह महिला उसके लिए तब तक जायज़ नहीं होगी जब तक वह किसी दूसरे पति से शादी न कर ले [551]। फिर, यदि वह दूसरा (पति) उसे तलाक़ दे देता है, तो उन दोनों पर कोई दोष नहीं है यदि वे पुनः मिल जाते हैं [552], बशर्ते वे अल्लाह की सीमाओं का पालन करें। और ये अल्लाह की सीमाएं हैं, जिन्हें वह उन लोगों के लिए स्पष्ट करता है जो ज्ञान रखते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 230 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[550] तीसरी तलाक़ की स्थिति – तलाक़-ए-मुघल्लाज़ा (अपरिवर्तनीय तलाक़)

  • इस आयत में तीसरी तलाक़ की स्थिति को स्पष्ट किया गया है। जब किसी महिला को तीसरी बार तलाक़ दिया जाता है, तो यह तलाक़ अपरिवर्तनीय होता है (तलाक़-ए-मुघल्लाज़ा)।
  • इस तलाक़ के बाद, महिला और पुरुष के बीच कोई रिश्ता नहीं रह सकता जब तक कि महिला किसी दूसरे व्यक्ति से शादी न कर ले।
  • यह तलाक़ पूरी तरह से विवाह को रद्द कर देता है, और इसके बाद पुनः विवाह के लिए महिला को नया विवाह करना आवश्यक होता है।

[551] हला’ला का नियम – महिला का दूसरे पति से विवाह

  • जब महिला को तीसरी बार तलाक़ दिया जाता है, तो वह उसके लिए जायज़ नहीं होती, जब तक वह किसी दूसरे पति से शादी नहीं कर लेती।
  • "तंकीह" का मतलब है कि यह दूसरा विवाह पूर्ण रूप से किया जाना चाहिए, यानी केवल निकाह करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस विवाह को संभोग से भी पूरा करना होगा।
  • यह शर्त इसलिए रखी गई है ताकि तलाक़ का प्रयोग हल्के में न किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि महिला ने वास्तव में दूसरा विवाह किया है।

[552] पुनः विवाह की संभावना – शर्तों के साथ वापसी

  • यदि दूसरा पति उसे तलाक़ दे देता है, तो पहले पति के साथ पुनः विवाह किया जा सकता है, लेकिन यह दोनों की आपसी सहमति से ही होगा।
  • यहाँ पर यह भी बताया गया है कि पुनः विवाह की प्रक्रिया तभी संभव है जब तीसरी तलाक़ पूरी हो चुकी हो और महिला ने दूसरे पति से विवाह और तलाक़ की पूरी प्रक्रिया पूरी की हो।
  • पुनः विवाह का मतलब यह नहीं है कि इसे जब चाहें किया जा सकता है, बल्कि यह एक कठोर और गंभीर प्रक्रिया है, जिसमें हर कदम की एक शर्त है।

सारांश:
इस आयत में तलाक़ के तीसरे चक्र के बाद की स्थिति को स्पष्ट किया गया है। तीसरी तलाक़ के बाद महिला और पति के बीच रिश्ता अपरिवर्तनीय हो जाता है, और वह महिला केवल तभी पहले पति के साथ वापस मिल सकती है जब उसने किसी अन्य व्यक्ति से सच्चे तरीके से विवाह किया हो और फिर वह दूसरा पति उसे तलाक़ दे दे। यह प्रक्रिया हला’ला के नाम से जानी जाती है और यह सुनिश्चित करती है कि तलाक़ का प्रयोग किसी गलत तरीके से न हो।

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