Transliteration: (Haafizoo 'alas salawaati was Salaatil Wustaa wa qoomoo lillaahi qaaniteen)
इस आयत से हमें यह सिखने को मिलता है कि नमाज़ केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं है, बल्कि इसे ध्यान, निष्ठा, और समय के प्रति पाबंदी के साथ अदा करना चाहिए। विशेष रूप से मध्यवर्ती नमाज़ (सलात अल-असर) का समय महत्वपूर्ण है, और हमें इसे विशेष ध्यान और समर्पण के साथ अदा करना चाहिए।
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