कुरान - 2:276 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

276
يَمۡحَقُ ٱللَّهُ ٱلرِّبَوٰاْ وَيُرۡبِي ٱلصَّدَقَٰتِۗ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ كَفَّارٍ أَثِيمٍ

Transliteration: (Yamhaqul laahur ribaa wa yurbis sadaqaat; wallaahu laa yuhibbu kulla kaffaarin aseem)

अल्लाह सूद को मिटाता (बे-बरकत करता) है और ख़ैरात को बढ़ाता है; और अल्लाह किसी नाशुकरे, बड़े गुनाहगार को पसंद नहीं करता। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 276 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-बक़रह - आयत 276

✅ सूद की नहूसत और सद्क़े की बरकत

सूद का माल देखने में बढ़ता हुआ लगता है मगर हक़ीक़त में अल्लाह उसकी बरकत मिटाकर उसे तबाह कर देता है, जबकि सद्क़ा व ज़कात के माल में अल्लाह बेहिसाब बरकत और अज़्र अता फ़रमाता है।

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