कुरान - 2:48 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

48
وَٱتَّقُواْ يَوۡمٗا لَّا تَجۡزِي نَفۡسٌ عَن نَّفۡسٖ شَيۡـٔٗا وَلَا يُقۡبَلُ مِنۡهَا شَفَٰعَةٞ وَلَا يُؤۡخَذُ مِنۡهَا عَدۡلٞ وَلَا هُمۡ يُنصَرُونَ

Transliteration: (Wattaqoo Yawmal laa tajzee nafsun 'an nafsin shai'anw wa laa yuqbalu minhaa shafaa'atunw wa laa yu'khazu minhaa 'adlunw wa laa hum yunsaroon)

[48] और उस दिन से डरो, जब कोई आत्मा किसी दूसरी आत्मा के कुछ भी काम नहीं आएगी, और न उससे कोई सिफारिश [91] कबूल की जाएगी, और न उससे कोई फ़िदया लिया जाएगा, और न ही उन्हें (काफ़िरों को) मदद दी जाएगी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 48 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

🔹 [91] यह रोक केवल काफ़िरों के लिए है

इस आयत में जो सिफारिश और मदद की मनाही है, वह काफ़िरों के लिए है। क़यामत के दिन न उन्हें कोई सहारा मिलेगा, न सिफारिश मानी जाएगी, न कोई फ़िदया उन्हें बचा सकेगा।
लेकिन यह उन आयात से टकराती नहीं जो ईमान वालों के लिए शफ़ाअत (सिफारिश) की इजाज़त देती हैं।
जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए—even अगर गुनाहगार हों—उन्हें अल्लाह की इजाज़त से हुज़ूर ﷺ, नेक बंदों और औलियाओं की सिफारिश का फ़ायदा मिलेगा।
कुछ काफ़िरों को जहन्नम में डाला जाएगा ताकि कुछ मोमिनों को उनके बदले से निजात दी जाए—यह अल्लाह की रहमत का एक जलवा है।
इस आयत में काफ़िरों की मायूसी और मोमिनों के लिए रहमत की उम्मीद का साफ़ फर्क बयान किया गया है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now